मिर्जामुराद (वाराणसी)। ब्रिटिश शासन काल में बना मिर्जामुराद थाना का भवन निष्प्रयोज्य होने के कारण दो वर्ष पूर्व बुलडोजर चलाकर धराशायी किया जा चुका हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11अप्रैल को काशी (मेंहदीगंज) आगमन पर मिर्जामुराद थाना के नए प्रशासनिक भवन का शिलान्यास होने की खबर से पुलिसकर्मियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी हैं।
वाराणसी-प्रयागराज मार्ग के किनारे मिर्जामुराद में वर्ष 1939 में थाना भवन का निर्माण कराया गया था।भवन के अंदर कार्यालय, प्रभारी कक्ष, मालखाना, बंदी गृह, भोजनालय व बैरक बना था। भवन की दीवार व छत जर्जर हो जाने से वर्ष 2009-10 में ही भवन को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था।
जर्जर भवन में ही थाना चल रहा था। किंतु वर्ष 2020 में एक बैरक व वाहन के गैराज को मिलाकर उसकी छत की मरम्मत करा किसी तरह कार्यालय, बंदी गृह, मालखाना व प्रभारी कक्ष का अस्थाई निर्माण करा कार्य चलाया जा रहा हैं।
दो वर्ष पूर्व निष्प्रयोज्य (कंडम) घोषित थाना की नीलामी की प्रक्रिया हुई थी। प्रयागराज के ठेकेदार द्वारा जेसीबी चलाकर भवन को तोड़ भूमि को समतल कर दिया गया। सिपाहियों को रहने के लिए दो नया बैरक बनाया गया हैं।नए प्रशासनिक भवन के निर्माण हेतु शासन द्वारा 7.99 करोड़ की राशि स्वीकृति हुई हैं।
*मिर्जा की पूरी हुई मुराद तो बना मिर्जामुराद*
राजस्व अभिलेख में मिर्जामुराद के नाम से कुछ भी नही हैं।अभिलेख में गौर गांव हैं। चर्चा हैं कि मिर्जा नामक शासक इधर से गुजर रहा था। छावनी बना यही रुका रहा, उसे कोई संतान नही था। इसी बीच यही पर उसकी मुराद पूरी हुई और उसे संतान की प्राप्ति हुई। संतान का सुख प्राप्त होने से जब उसकी मुराद पूरी हुई तो उन्होमे मिर्जामुराद नाम रख थाना भवन का निर्माण करा दिया था।
Author: Rajesh Sharma
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