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वाराणसी के 250 इलाकों में फॉगिंग के बाद भी कम नहीं हो रहा मच्छरों का प्रकोप, धुआं हटते ही फिर आ जा रहे

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वाराणसी :- मच्छरों के प्रकोप से पूरा शहर परेशान है। नगर निगम का दावा है कि हर जगह फॉगिंग कराई जा रही है। 100 वार्डों के तकरीबन 250 इलाकों में फॉगिंग कराई गई। बावजूद इसके मच्छर कम नहीं हो रहे हैं। जनता जिस फॉगिंग के लिए परेशान है उसका असर मच्छरों पर नहीं हो रहा है। मशीनों के धुएं से सिर्फ थोड़ी देर के लिए मच्छर भाग रहे हैं। धुआं हटते ही फिर मच्छर आ जाते हैं। नगर निगम सदन में भी यह मुद्दा उठ चुका है। नगर निगम ने सभी वार्डों के लिए रोस्टर बनाया है। जिसके अनुसार फॉगिंग कराई जा रही है। दरअसल, मच्छर फॉगिंग में इस्तेमाल हो रहे केमिकल के प्रतिरोधी हैं। फॉगिंग के धुएं से मच्छर मरते नहीं, बल्कि कुछ देर के लिए भाग जाते हैं। फॉगिंग मशीनों में 95 प्रतिशत डीजल में कीटनाशक मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। मच्छरों का शरीर उस केमिकल के रिपेलेंट अब नहीं है, वहीं दूसरी तरफ यह केमिकल इंसानों के लिए बहुत ही खतरनाक है। इसके धुएं से अस्थमा जैसी खतरनाक बीमारियां भी हो सकती हैं।

क्या बोले अधिकारी :- मच्छरों में रजिस्टेंस नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार मच्छरों में रजिस्टेंस डेवलप हो गया है। 15 फरवरी से 31 मार्च फेवरेबल टाइम होता है। इस मौसम में क्यूलेक्स मच्छर अधिक होते हैं। हालांकि इनके काटने से बीमारी नहीं फैलती है। इस समय मैलाथियान टेक्निकल से फाॅगिंग हो रही है। इसके अलावा किंग फाक्स और साइफेनोथ्रिन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

निगम के पास 8 बड़ी और 108 छोटी मशीनें नगर निगम में 108 छोटी और 8 बड़ी मशीनें हैं। इसके बाद भी फॉगिंग का असर दिख नहीं रहा है। निगम हर महीने मच्छर भगाने में लगभग 4 से 5 लाख रुपये खर्च करता है। अभी 100 वार्डों में मच्छर भगाने का काम चल रहा है। नगर निगम फॉगिंग करने में जिस केमिकल का प्रयोग करता है उसका मच्छरों पर कोई असर नहीं हो रहा।

नई दवाओं की खोज में जुटा नगर निगम मच्छरों पर काबू पाने के लिए नगर निगम अब नई तरह की दवाओं की खोज में जुट गया है। 22-32 डिग्री सेल्सियस तापमान मच्छरों की ब्रीडिंग के लिए अनुकूल होता है। बीते कुछ दिनों से तापमान ऐसा ही होने तकरीबन दस दिनों से मच्छरों की संख्या बढ़ी है।

इस मौसम में एक मच्छर 20 हजार मच्छरों को पैदा करता है इस मौसम में एक मच्छर 20 हजार मच्छरों को पैदा करता है। इनमें से तकरीबन बीस फीसदी मच्छर विभिन्न कारणों से मर जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मच्छरों को मारने के लिए नगर निगम फॉगिंग के लिए जिस केमिकल मेलिथियान का इस्तेमाल कर रहा है। वह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद नुकसानदायक है।

स्थिर जल में पैदा होते मच्छरों के लार्वा इस समय का मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल है। शहर में ज्यादातर स्थानों पर स्थिर जल होने से इनके प्रजनन के लिए ओर बेहतर माहौल मिल जा रहा है। इनके लार्वा पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाते।

फॉगिंग के लिए तैयार होने वाले घोल का मानक

– पहले- मैलाथियान (250 मिली), डीजल (5 लीटर), पेट्रोल (1 लीटर)

– अब – किंग फाक्स (50 मिली), डीजल (5 लीटर), पेट्रोल (1 लीटर)

घर के पास की नालियों में डालें डीजल घरों के आसपास के नाले में पांच-छह दिन पर थोड़ा सा डीजल गिराना चाहिए। इससे पानी पर तेल की एक पतली परत बन जाएगी और मच्छरों के लार्वा सांस न ले पाने से मर जाएंगे।

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Author: vartahub

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