Home » Blog » साइबर गुलामी..साइबर ठग अपनों से ही अपनों को लुटवा रहे है

साइबर गुलामी..साइबर ठग अपनों से ही अपनों को लुटवा रहे है

Facebook
Twitter
WhatsApp

आधुनिक होती दुनिया और रोज नई नई तकनीक के अभ्युदय के साथ ही रोज ही दुनिया को साइबर ठगों के नए नए स्कैम से भी रुबरु होना पड़ रहा है,साइबर ठगी लगभग दुनिया के हर देश की सरकार के लिए बड़ी दिक्कत बन चुकी है. ऐसे में विदेश में नौकरी ढूंढने वाले लोगों के लिए एक और परेशानी सामने आ रही है. दरअसल नौकरी ढूंढने वाले लोगों को जबरन साइबर लुटेरों गिरोह में में शामिल किया जा रहा है जिनसे साइबर ठगी करवाई जा रही है.

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली आप्रवासन ब्यूरो(बीओआई) के आंकड़ों के मुताबिक कंबोडिया, थाइलैंड, म्यांमार और वियतनाम में विजिटर वीजा पर जनवरी 2022 से मई 2024 के बीच 73,138 यात्री भारत से यात्रा पर गए थे,इसमें से 29,466 भारतीय अभी तक वापस लौटे नहीं हैं और आशंका है कि इन सब को बंधक बनाकर साइबर ठगी के स्कैंडल में प्रयोग किया जा रहा है

साइबर स्लेवरी के तहत काम करने वाले लोगों को साइबर लुटेरों का गिरोह दवाब बना कर भारतीयों को कॉल कर विभिन्न तरह के स्कैंडल के माध्यम से ठगी करने पर मजबूर करता है,इंटरनेट पर मौजूद प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को टारगेट किया जाता है. भारतीय होने की वजह से कई लोग हिंदी और स्थानीय भाषा बोल सकते हैं. इस तरह के झांसे में कई लोग फंस जाते हैं, उसके बाद वे अपने लाखों-करोड़ो रुपये गंवा देते हैं.

साइबर क्राइम का गढ़ बना कंबोडिया…..साइबर फ्रॉड करने वाले कंबोडिया में एक बड़ा गैंग चलाते है. इस गैंग में मलेशिया, चीन, वियतनाम, म्यांमार के लोग शामिल हैं. यह तमाम लोग मिलकर भारतीयों को नौकरी दिलाने के नाम पर ऑनलाइन भर्ती करते हैं. फिर जो भारतीय कंबोडिया में नौकरी करने जाता है उसको जबरदस्ती साइबर फ्रॉड के लिए मजबूर किया जाता हैं,धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों के मालिक हमेशा चीनी नागरिक होते हैं. ये दूसरों से संवाद करने के लिए मलेशियाई या कंबोडियाई लोगों को अनुवादक के रूप में नियुक्त करते हैं. इस रैकेट में बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भारत और कंबोडिया के लोग एजेंट के रूप में काम करते हैं. एजेंट भारत से लोगों को वैध काम के लिए भर्ती करते हैं. उसके बाद जैसे ही एक बार जब वे कंबोडिया पहुंच जाते हैं तो उन्हें घोटालेबाज कंपनियों को बेच दिया जाता है.

कंपनियां उनके पासपोर्ट ले लेती हैं और फिर उनसे घोटाले करने के लिए दिन में 12 घंटे काम करवाती हैं. अगर कोई ऐसा काम करने से इनकार करता है तो उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. बिजली का झटका दिया जाता है या एकांत कारावास आदि दिया जाता है. कई भारतीय जो ऐसे घोटालों में शामिल होने के लिए तैयार नहीं होते हैं, वे वहां फंस जाते हैं,भारतीय जांच एजेंसियों का कहना है कि हम उनकी पहचान करने, उनसे संपर्क करने और उचित माध्यमों से उन्हें भारत वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं. घोटाले वाली कंपनी के स्थान, उनके कार्यकर्ताओं, उनकी कार्यशैली और उनके प्रबंधन के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की जा रही है,भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने हाल ही में वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था. इसमें साइबर फ्रॉड की घटनाओं का जिक्र किया गया. बताया गया कि साइबर फ्रॉड की ज्यादातर घटनाएं कंबोडिया, दुबई, चीन और म्यामांर से हो रही हैं.

भारत सरकार का एक्शन…भारत सरकार ने साइबर गुलामी से जुड़े 21.7 मिलियन मोबाइल फोन कनेक्शन काट दिए हैं तथा घोटालेबाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले संचार चैनलों को बाधित करने के लिए लगभग 226,000 हैंडसेट ब्लॉक कर दिए हैं।साइबर गुलामी के विरुद्ध प्रयासों में समन्वय स्थापित करने के लिए गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित विभिन्न मंत्रालयों के सदस्यों को शामिल करते हुए एक अंतर-मंत्रालयी पैनल की स्थापना की गई है।

दूरसंचार ऑपरेटरों को उन अंतर्राष्ट्रीय कॉलों को रोकने का काम सौंपा गया है जिनमें भारतीय मोबाइल नंबर होते हैं, जो धोखाधड़ी वाले संचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। सरकार संकट में फंसे व्यक्तियों का पता लगाने और उनकी सहायता करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में घूम रहे भारतीय मोबाइल नंबरों पर सक्रिय रूप से निगरानी रख रही है।

विदेश जाकर मोटा पैसा कमाने की ललक है तो बेहद सावधान रहें…साइबर स्लेवरी या साइबर गुलामी एक गंभीर समस्या है, भारतीय लोगो को उच्च वेतन वाली नौकरियों का झांसा देकर साइबर गुलामी के जाल में फंसाया जा रहा है। सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कई उपाय किए हैं, लेकिन इसके लिए आपका भी जागरूक रहना बेहद जरूरी है, जिस देश जाना है, जिस कंपनी में जॉब करना है, जिस ट्रैवल एजेंट के माध्यम से आप बाहर जा रहे है सबकी साख और पुराने इतिहास को अच्छे से जांच पड़ताल कर लें तभी बाहर जाने की सोचें

vartahub
Author: vartahub

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें