प्रयागराज हाईकोर्ट ने कहा पारिवारिक अदालतों की सुस्ती सुप्रीम आदेशों की अवहेलना है,अगर संविधान की शपथ लेकर बैठे न्यायाधीश सुप्रीमकोर्ट के आदेश को नहीं मानेगें तो न्याय व्यवस्था कैसे बचेगी, इसमे पीड़ित महिलाओं का गरिमामय जीवन प्रभावित होगा,तारीख पर तारीख मे उलझी भरण पोषण की लड़ाई पर हाईकोर्ट चिंतित,एक जज पर 1500 से 2000 मुकदमों का बोझ है,इससे पहले कोर्ट ने प्रदेश के सभी परिवार न्यायालय में लंबित मुकदमों की जानकारी तलब की थी, कोर्ट ने पाया कि प्रयागराज, आगरा, महाराजगंज जैसे जिलों में 1500 से 2000 तक मुकदमे एक-एक जज के पास लंबित है 23 मई 2024 तक 74 में से केवल 48 अदालतों ने अनुपालन रिपोर्ट् सौंपी जिसमें से कई ने सिर्फ औपचारिक हाफनामे पेश किए,सुनवाई को बार-बार टालना प्रक्रियात्मक कुप्रबंधन ही नहीं बल्कि न्याय देने से इनकार करने के बराबर है,
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