काशी हिंदू विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे छात्र ने भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया है। लेकिन जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा तब तक धरना स्थल पर छात्रों का अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्रों के विरोध के बाद विश्वविद्यालय द्वारा कमेटी बनाई गई थी कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर राजाराम शुक्ल ने छात्रों को मौखिक आश्वासन दिया है कि उनके बातों को संज्ञान में लिया गया है और जल्द ही उस पर विचार किया जाएगा।
आइए अब जानते हैं क्यों केन्द्रीय कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे स्टूडेंट्स मामला सामाजिक विज्ञान संकाय के सामाजिक समावेशन नीति अध्ययन केंद्र का है जिसमें मुख्य विषय सोशल इनक्लूजन या सब लैटर्न स्टडीज ही था और इसी विषय से एमफिल भी किया है। ऐसे में सब लैटर्न विषय से रेट एंग्जंप्टेड कैटेगिरी और मेन डिसिप्लीन में पीएचडी इंटरव्यू होगा। यानी कि उसे सीधा इंटरव्यू देने का मौका मिलेगा, लेकिन इस सीट पर कई एलाइड विषयों के भी आवेदकों ने मेन डिसिप्लीन में इंटरव्यू दे दिया, जबकि तय हुआ था कि ऐसा नहीं किया जाएगा, जिसके लिए छात्रों ने एक महीने पूर्व विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारियों को पत्रक के माध्यम से न्याय की मांग के साथ शोध प्रवेश पूरा करने की मांग की की थी। धरने पर बैठे छात्रों ने आरोप लगाया है कि सबाल्टर्न स्ट्डीज पीएचडी इंटरव्यू में धांधली हुआ है। छात्रों ने कहा एलायड विषय को मेन डिसिप्लिन में इंटरव्यू कराया गया जो विश्वविद्यालय के नियम के विरुद्ध है।
कमेटी ने देर रात बैठक कर सुनाया निर्णय अभय सिंह ने कहा – विश्विद्यालय ने निष्पक्ष जांच हेतु प्रोफेसर राजाराम शुक्ल के नेतृत्व में कमेटी बनाकर सभी तथ्यों पर विचार कर निर्णय देने की बात कही थी। आज आमरण अनशन के 6वें दिन कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर राजाराम शुक्ल की अध्यक्षता में चार बजे से लेकर शाम सात बजे तक बैठक चली बैठक के बाद कमेटी अध्यक्ष प्रोफेसर राजाराम शुक्ल के साथ, छात्र अधिष्ठाता, चीफ प्रॉक्टर सहित तमाम अधिकारियों की उपस्थिति में धरना स्थल जाकर आमरण अनशन पर बैठे छात्र सत्यनारायण को मौखिक निर्णय सुना कर आमरण अनशन जूस पीला कर समाप्त कराया गया, मौखिक निर्णय में प्रोफेसर शुक्ल ने विश्विद्यालय द्वारा प्रवेश परीक्षा में हुई गड़बड़ी को सुधारने व छात्र को न्याय मिलने की बात कही, दूसरे दिन लिखित निर्णय देने की बात कही जिसको सुनकर छात्रों में खुशी की लहर दौड़ उठी जिसका इजहार उन्होंने एक-दूसरे को मिठाई खिला कर किया।




