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ज्ञानवापी : मूलवाद मामले में टली सुनवाई, 33 साल पुराने केस में रिवीजन पर आपत्ति; फिर मिली तारीख

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वाराणसी :- सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) भावना भारती की कोर्ट में सोमवार को ज्ञानवापी के वर्ष 1991 के पुराने मुकदमे में सुनवाई हुई। इस मामले में वादी रहे मृतक हरिहर पांडेय की बेटियों की ओर से दाखिल पक्षकार बनने संबंधित वाद में संशोधित करने के लिए अर्जी पर सुनवाई शुरू हो गई।

बेटियों की ओर से अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने बहस शुरू की है। बहस जारी रखते हुए अगली सुनवाई छः अक्टूबर की तिथि नियत की है। पिछली तिथियों पर कोर्ट ने इस मामले के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को उक्त पद और मुकदमे से हटाने के प्रार्थना पत्र में पारित आदेश में संशोधन के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था।उसको साथ ही पक्षकार बनने संबंधित लंबित वाद पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने तिथि नियत की थी। पिछली तिथि पर तीनों बेटियां की ओर से अधिवक्ता ने एक अर्जी दी। अर्जी में कहा गया कि उसके द्वारा दाखिल वादमित्र के हटाने संबंधित अर्जी को खारिज कर दिया। मगर पक्षकार बनने संबंधित अर्जी में बेटियों की ओर से संशोधित करनी है। कहा गया कि वादी संख्या पांच जो प्राइवेट ट्रस्ट है। उसके सचिव खुद वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ही हैं, जो इस वाद में अनावश्यक और अनुचित पक्षकार हैं। इनको हटाना बहुत ही आवश्यक है।वादमित्र जो अपने शासकीय कार्य क्षेत्र के दौरान भी इनकी शैली पर सवाल उठा गया था।

इस मामले में भी अपने हित साधने के लिए अनावश्यक रूप से विधि का दुरुपयोग करते हुए वाद मित्र नियुक्त कराया गया। इस तरह इस पक्षकार बनने संबंधित अर्जी में संशोधित करते हुए कुछ अनुदेशों को जोड़ने की गुहार लगाई है। इस पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने आपत्ति दाखिल कर दिया है।

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Author: vartahub

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