नई दिल्ली: देश में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। 150 साल पूरे होने के वर्ष में जहां केंद्र सरकार और BJP इसे राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के रूप में जोर-शोर से सामने रख रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में गीत के पहले दो अंतरों के गायन के अपने पुराने 1937 के निर्णय का हवाला दिया है। इसी को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।विवाद ने उस समय और जोर पकड़ा जब 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन का एक वीडियो सामने आया। BJP नेताओं ने वीडियो में कांग्रेस नेताओं के कथित इशारों और व्यवहार को लेकर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने BJP पर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ?
इस पूरे विवाद के पीछे दो अलग-अलग घटनाएं हैं।पहली, कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) का फैसला, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरों को ही गाने की अपनी ऐतिहासिक स्थिति को दोहराया।दूसरी, 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम का वीडियो, जिसे BJP ने कांग्रेस नेतृत्व पर राष्ट्रीय गीत के प्रति कथित अनादर के आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल किया। इसके बाद मामला राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर शिकायत और पुलिस जांच तक पहुंच गया।
कांग्रेस क्यों गा रही है सिर्फ पहले दो अंतरे?
कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ने कोई नया फैसला नहीं लिया है, बल्कि 1937 के अपने ऐतिहासिक निर्णय के अनुरूप पहले दो अंतरों को गाने की परंपरा को कायम रखा है।कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने पार्टी के रुख का बचाव करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ कांग्रेस और स्वतंत्रता आंदोलन से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है, लेकिन BJP इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है।कांग्रेस के कुछ नेताओं ने यह भी तर्क दिया है कि गीत के बाद के हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं से जुड़े संदर्भ हैं, जिसके कारण ऐतिहासिक रूप से इसके पूरे संस्करण को लेकर बहस होती रही है।
BJP का कांग्रेस पर क्या आरोप है?
BJP ने कांग्रेस के रुख पर तीखा हमला बोला है।गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले को लेकर गंभीर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को विभाजित करने जैसा कदम उठाया है। BJP का कहना है कि राष्ट्रीय गीत स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण प्रतीक है और इसके साथ किसी तरह का राजनीतिक भेदभाव नहीं होना चाहिए।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कांग्रेस के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।BJP नेताओं का यह भी आरोप है कि कांग्रेस का यह रुख तुष्टिकरण की राजनीति से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करती है।
15 अगस्त के वीडियो से क्यों बढ़ा विवाद?
15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन हुआ। इस दौरान सामने आए वीडियो में सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के कुछ इशारों और बातचीत को BJP नेताओं ने इस तरह पेश किया कि मानो वे गीत को रोकने के लिए कह रहे हों।कांग्रेस की ओर से BJP के इस दावे को राजनीतिक आरोप बताया गया है। हालांकि वीडियो को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि BJP नेताओं ने शिकायत भी दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस ने इस शिकायत के संबंध में जांच किए जाने की पुष्टि की है।
महत्वपूर्ण बात: केवल वीडियो में दिखाई देने वाले इशारों के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा को निश्चित रूप से साबित नहीं माना जा सकता। इस मामले में राजनीतिक दलों के दावे अलग-अलग हैं।
क्या ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगान है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान (National Anthem) है, जबकि ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत (National Song) है।
‘वंदे मातरम’ को स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला गीत माना जाता है। सरकार इस वर्ष इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
इसलिए समाचारों में ‘राष्ट्रीय गीत’ और ‘राष्ट्रगान’ को एक-दूसरे का पर्याय बताना सही नहीं होगा।
अब कानून को लेकर भी क्यों हो रही है चर्चा?
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 है।सरकारी जानकारी के अनुसार इस प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ को उस कानूनी संरक्षण के दायरे में लाना है, जो मौजूदा कानून में राष्ट्रगान को प्राप्त है। प्रस्तावित प्रावधान में जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने या उसके गायन में जुटी सभा में व्यवधान डालने को दंडनीय बनाने की बात है। प्रस्तावित सजा मौजूदा प्रावधान के अनुरूप तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकती है।इससे ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को एक नया कानूनी आयाम भी मिल गया है।
‘वंदे मातरम’ का इतिहास क्या है?
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। सरकारी ऐतिहासिक विवरण के अनुसार इसे 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित किया गया था और बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया।यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में इसे गाया था।यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आज की राजनीतिक बहस को और संवेदनशील बनाती है।1937 का फैसला फिर चर्चा में क्यों आया?
कांग्रेस अपने मौजूदा रुख के समर्थन में 1937 के उस ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दे रही है, जिसके तहत गीत के पहले दो अंतरों को प्राथमिकता देने की बात सामने आई थी।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला धार्मिक भावनाओं और राष्ट्रीय एकता से जुड़े पुराने विवादों को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। दूसरी ओर BJP का तर्क है कि आज ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति का प्रतीक है, इसलिए इसके पूरे स्वरूप को लेकर कांग्रेस का रुख उचित नहीं है।
विवाद अब हिमाचल और अन्य राज्यों तक पहुंचा
यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भी BJP और कांग्रेस के बीच ‘वंदे मातरम’ को लेकर तीखी बहस हुई और विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई।हिमाचल कांग्रेस के नेताओं ने BJP पर आरोप लगाया कि वह दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ‘वंदे मातरम’ विवाद को हवा दे रही है। BJP नेताओं ने इसके विपरीत कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत को लेकर गलत रुख अपनाने का आरोप लगाया।नागपुर में भी दो अंतरे गाए जाने को लेकर विवाद सामने आया, जिससे यह मुद्दा और राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
क्या यह विवाद आगे भी बढ़ सकता है?
मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए इसके जल्द खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।एक तरफ सरकार और BJP ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने को राष्ट्रीय गौरव से जोड़कर अभियान चला रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस अपने ऐतिहासिक निर्णय और गीत के अलग-अलग हिस्सों को लेकर पुराने विवादों का हवाला दे रही है।इसके अलावा प्रस्तावित कानूनी बदलाव के कारण यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि कानून, अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े सवालों को भी जन्म दे सकता है।
निष्कर्ष
‘वंदे मातरम’ विवाद इस समय BJP बनाम Congress की राजनीतिक लड़ाई का एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है। BJP कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान की कमी और तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस BJP पर ऐतिहासिक संदर्भों को नजरअंदाज कर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रही है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, राष्ट्रगान नहीं, और इसके इतिहास, धार्मिक संदर्भों तथा स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका को समझे बिना मौजूदा राजनीतिक विवाद को पूरी तरह समझना मुश्किल है।150वीं वर्षगांठ के बीच शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में संसद, राज्यों और राजनीतिक मंचों पर और तेज हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के आरोप और दावे संबंधित पक्षों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।
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