केन्द्र सरकार ने 2025-26 के बजट में बिहार को जो सौगातें दी हैं, उनमें तीन बड़ी खेती-किसानी से जुड़ी हैं। बिहार में मखाना बोर्ड के गठन से इसके उत्पादक किसानों को बाजार और मूल्य बढ़ने के आसार बने हैं। पश्चिमी कोसी नहर परियोजना को केन्द्र सरकार से मदद मिलेगी तो इसमें और निखार आएगा। किसानों को सिंचाई में मदद मिलेगी, साथ ही उत्पादन भी बढ़ेगा। बिहार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का अभाव सा रहा है। इससे खेतिहर उत्पादों का सामान्य उपयोग ही ज्यादा रहा है। बजट में राष्ट्रीय खाद्य प्रोद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन – संस्थान स्थापित करने की घोषणा हुई ‘है। इससे अब कई तरह के उत्पाद तैयार होंगे। उससे भी किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना बनेगी। गौरतलब है कि बिहार में 40 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में मखाना की खेती होती है। सालाना 26 हजार टन मखाना का बिहार में उत्पादन होता है। देश के कुल उत्पादन का 85% मखाना बिहार में ही उत्पादित होता है। मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा और खगड़िया जिलों में इसकी बहुतायत में खेती होती है व पूरी दुनिया में इसका निर्यात होता है।मखाना बोर्ड के गठन के बाद इसकी खेती और कारोबार में और विस्तार होगा। वहीं, पश्चिम कोसी नहर परियोजना बिहार तथा मिथिलांचल की प्रमुख सिंचाई परियोजना है। फिलहाल दो जिलोंमधुबनी और दरभंगा जिले के 36 प्रखंडों के लाखों किसानों को इससे लाभ मिल रहा है। केन्द्र सरकार की मदद के बाद नहरों का और विस्तार होगा। नहरों के विस्तारीकरण के बाद इस योजना के अंतर्गत कुल सिंचन क्षमता 397877 हेक्टेयर हो जाएगी।
मखाना बोर्ड का होगा गठन..
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