शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि पर इस वर्ष दुर्लभ माने जाने वाले शुक्ल और ब्रह्म योग का संयोग बनेगा। दोनों योग 22 सितंबर को सूर्योदय के साथ आरंभ होंगे। शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा पर दोनों योग छह दशक से अधिक समय बाद एक साथ बनेंगे। दोनों योगों के प्रभाव से आदि शक्ति की आराधना करने वालों के सामने आने वाली प्राकृतिक अड़चनों का सहज समाधान होगा। शुक्ल योग में आदि शक्ति का पूजन करने वालों को समस्त सुखों की प्राप्ति भी होगी। ब्रह्मयोग दिन में 03:53 बजेतकरहेगा। शुक्ल योग शाम 07:59 बजे तक रहेगा। भूगु संहिता विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शास्त्री के अनुसार इस वर्ष नवरात्र में चतुर्थी तिथि की वृद्धि है। 25 एवं 26 सितंबर दोनों ही दिन चतुर्थी तिथि है लेकिन इसका मान 25 सितंबर को ही होगा। 26 सितंबर को पूर्वाह्न बाद पंचमी तिथि लग जाएगी।
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