इलाहाबाद हाईकोर्ट का हालिया फैसला केवल एक व्यक्ति को न्याय दिलाने का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। प्रयागराज में एक व्यक्ति को ‘शांति भंग’ की आशंका के नाम पर आठ दिन तक हिरासत में रखना कानून और संविधान दोनों की भावना के विपरीत पाया गया। अदालत ने मुआवजा देकर स्पष्ट कर दिया कि नागरिकों की स्वतंत्रता से खिलवाड़ अब महंगा पड़ेगा।



