तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पास किए गए एक बिल को राष्ट्रपति की मंज़ूरी के इंतज़ार में काफ़ी समय तक लटकाकर रखा गया था जिसके बाद तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई। सुप्रीम कोर्ट के बड़बोले जज जस्टिस पारडीवाला की अगुआई वाले बेंच ने निर्णय दिया कि यदि राष्ट्रपति किसी क़ानून को विचार के लिए अपने पास अधिक समय तक रखते हैं तो वह तीन महीने पश्चात अपने आप प्रभाव में आ जाएगा और इसके लिए राष्ट्रपति के सहमति की “आवश्यक आवश्यकता” को हटा दिया था।
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