तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पास किए गए एक बिल को राष्ट्रपति की मंज़ूरी के इंतज़ार में काफ़ी समय तक लटकाकर रखा गया था जिसके बाद तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई। सुप्रीम कोर्ट के बड़बोले जज जस्टिस पारडीवाला की अगुआई वाले बेंच ने निर्णय दिया कि यदि राष्ट्रपति किसी क़ानून को विचार के लिए अपने पास अधिक समय तक रखते हैं तो वह तीन महीने पश्चात अपने आप प्रभाव में आ जाएगा और इसके लिए राष्ट्रपति के सहमति की “आवश्यक आवश्यकता” को हटा दिया था।
टॉप स्टोरी
ज़रूर पढ़ें



बॉन्ड मार्केट में दबाव, लेकिन ग्लोबल स्टॉक्स ने दिखाई मजबूती
September 30, 2026

SIP का नया रिकॉर्ड, ₹ 32,297 करोड़ निवेश
September 30, 2026
