आज के डिजिटल युग में जहां एक क्लिक से दुनिया आपकी मुट्ठी में आ जाती है, वहीं उसी क्लिक में आपकी सारी जमा-पूंजी भी हवा हो सकती है। भारत में साइबर ठगी अब महज अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक युद्ध की तरह फैल चुकी है।भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में ही देश में 21 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं और ठगों ने लगभग 19,800 करोड़ रुपये की ठगी की।पिछले छह वर्षों (2020-2025) में कुल नुकसान 52,976 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यह आंकड़े केवल दर्ज शिकायतों के हैं; असल नुकसान इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।
साइबर ठगी का दायरा अब इतना व्यापक हो चुका है कि बुजुर्ग, युवा, शिक्षित-अशिक्षित, शहरी-ग्रामीण—कोई भी सुरक्षित नहीं। सबसे ज्यादा नुकसान निवेश स्कैम से हुआ, जिसमें फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स, स्टॉक मार्केट या क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर लोगों को लुभाया जाता है। 2025 में कुल नुकसान का 77 प्रतिशत इसी श्रेणी में दर्ज हुआ। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट (फर्जी पुलिस-कस्टम अधिकारी बनकर धमकाना), क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन, ई-कॉमर्स धोखाधड़ी, फर्जी लोन ऐप्स और मैलवेयर अटैक आम हो गए हैं। ठग अब UPI स्कैनिंग, फेक QR कोड, वर्क-फ्रॉम-होम जॉब ऑफर और AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो तक का सहारा ले रहे हैं।कई मामलों में ठगी का स्रोत कंबोडिया, म्यांमार और लाओस जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से संचालित गिरोह होते हैं।महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे पांच राज्यों में ही 2025 के कुल नुकसान का आधे से अधिक हिस्सा दर्ज हुआ। महाराष्ट्र में अकेले 3,203 करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि कर्नाटक में 2,413 करोड़।
शहरीकरण, उच्च इंटरनेट पैठ और डिजिटल पेमेंट्स की आसानी ने इन राज्यों को ठगों का प्रमुख ठिकाना बना दिया है।सरकार ने इस खतरे को गंभीरता से लिया है। I4C के माध्यम से लाखों फर्जी SIM, IMEI और म्यूल अकाउंट्स ब्लॉक किए जा चुके हैं। 1930 हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in पोर्टल पर त्वरित शिकायत से कई मामलों में राशि रिकवर भी हुई है।2026 में SIM-बाइंडिंग और CNAP जैसे नए नियम लागू होने से फर्जी कॉल्स पर लगाम लगने की उम्मीद है। फिर भी, कानून-व्यवस्था और तकनीकी उपायों से ज्यादा महत्वपूर्ण है जन-जागरूकता।
बचाव के.उपाय..
अनजान लिंक पर क्लिक न करें, OTP या पासवर्ड कभी साझा न करें।
UPI ट्रांजेक्शन से पहले प्राप्तकर्ता का नाम और नंबर दोबारा जांचें।
निवेश के नाम पर कोई ऐप डाउनलोड करने से पहले RBI या SEBI की वेबसाइट पर वैरिफाई करें।
बैंक या पुलिस का दावा करने वाली कॉल पर संदेह करें; खुद संबंधित नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें।
दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें और नियमित रूप से पासवर्ड बदलें।
संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या पोर्टल पर रिपोर्ट करें।
साइबर ठगी अब व्यक्तिगत लापरवाही का नहीं, सामूहिक जागरूकता की कमी का परिणाम है। तकनीक हमें जोड़ती है, लेकिन सतर्कता ही हमें बचाती है। यदि हम छोटी-छोटी सावधानियां बरतें, तो ठगों का खेल बिगाड़ सकते हैं।




