नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में यह सवाल फिर चर्चा का विषय बन गया है कि क्या तीसरा बच्चा होने पर कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने का अधिकार खो देता है। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट में चल रही उस सुनवाई को माना जा रहा है, जिसमें कुछ राज्यों में लागू दो-बच्चे की पात्रता शर्त पर अदालत ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने संकेत दिया कि देश की जनसंख्या संबंधी परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं। प्रजनन दर में लगातार आई कमी और बदलते सामाजिक-आर्थिक हालात को देखते हुए अदालत ने पूछा कि क्या दशकों पहले बनाए गए ऐसे प्रावधान आज भी उसी उद्देश्य को पूरा कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें लागू किया गया था।
हालांकि, इस पूरे मामले में एक तथ्य स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अदालत ने न तो दो-बच्चे के नियम को समाप्त किया है और न ही पूरे देश में तीसरा बच्चा होने पर चुनाव लड़ने पर कोई रोक लगाई है। मामला अभी न्यायिक विचाराधीन है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह नियम केवल उन राज्यों में प्रभावी है, जहां पंचायत या स्थानीय निकाय चुनावों के लिए संबंधित कानून में ऐसा प्रावधान मौजूद है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए पूरे देश में ऐसा कोई केंद्रीय कानून लागू नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर फैल रहे ऐसे दावे कि “तीसरा बच्चा होने पर अब कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकेगा”, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि अदालत भविष्य में कोई महत्वपूर्ण फैसला देती है, तो उसका असर उन राज्यों के कानूनों और स्थानीय निकाय चुनावों की पात्रता शर्तों पर पड़ सकता है। फिलहाल कानूनी स्थिति यथावत बनी हुई है।
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