नई दिल्ली : आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि अब बेहद करीब है। हर साल की तरह इस बार भी कई करदाता यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार समय-सीमा बढ़ा सकती है। हालांकि, अब तक ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और टैक्स विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि इस बार डेडलाइन बढ़ने की संभावना कम है। ऐसे में अंतिम समय तक इंतजार करना कई लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हर साल क्यों उठती है डेडलाइन बढ़ने की चर्चा?
पिछले कुछ वर्षों में विशेष परिस्थितियों—जैसे तकनीकी दिक्कतों या पोर्टल संबंधी समस्याओं—के कारण सरकार ने कुछ मौकों पर ITR दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाई थी। इसी वजह से हर वर्ष अंतिम दिनों में यह चर्चा शुरू हो जाती है कि शायद इस बार भी राहत मिल जाए। लेकिन इस वर्ष फिलहाल ऐसी कोई असाधारण स्थिति सामने नहीं आई है, जिसके आधार पर समय-सीमा बढ़ाने की आवश्यकता दिखाई दे। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अटकलों के भरोसे रिटर्न दाखिल करना टालना समझदारी नहीं होगी।
देरी करने से क्या हो सकता है नुकसान? यदि आप अंतिम समय तक इंतजार करते हैं, तो कई तरह की परेशानियां सामने आ सकती हैं—
- ई-फाइलिंग पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
- Form 26AS, AIS या TDS में किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसे सुधारने का समय कम रह जाएगा।
- रिटर्न देर से दाखिल होने पर कानून के अनुसार लेट फीस और अन्य लागू ब्याज देना पड़ सकता है।
- टैक्स रिफंड मिलने में भी अनावश्यक देरी हो सकती है।
रिटर्न भरने से पहले इन बातों की करें जांच ITR दाखिल करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि—
- Form 16 की जानकारी सही है।
- AIS और Form 26AS का मिलान कर लिया गया है।
- बैंक ब्याज, निवेश और अन्य आय का सही विवरण शामिल किया गया है।
- सही ITR फॉर्म का चयन किया गया है।
- रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन भी समय पर कर दिया गया है।
क्या करें करदाता?
यदि आपके सभी दस्तावेज तैयार हैं, तो बिना किसी अफवाह पर भरोसा किए जल्द से जल्द ITR दाखिल करना बेहतर रहेगा। यदि सरकार भविष्य में कोई निर्णय लेती है, तो उसकी आधिकारिक जानकारी आयकर विभाग की ओर से जारी की जाएगी। तब तक मौजूदा समय-सीमा को ही अंतिम मानकर तैयारी पूरी करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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