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शेयर बाजार का साप्ताहिक विशेषांक : आठवें सप्ताह भी गिरावट, अब RBI नीति और वैश्विक संकेतों पर टिकी बाजार की नजर

शेयर बाजार का साप्ताहिक विशेषांक
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मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह एक बार फिर चुनौतीपूर्ण रहा। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रखा। 26 सितंबर से 1 अक्टूबर तक के कारोबारी सप्ताह में Nifty 50 करीब 3.1% और Sensex करीब 2.7% नीचे रहे। इसके साथ ही भारतीय बाजार में लगातार आठवें सप्ताह गिरावट दर्ज हुई, जो लंबे समय में सबसे लंबी गिरावट की श्रृंखलाओं में शामिल है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण NSE और BSE बंद रहे।

सप्ताहकी बाजार तस्वीर

 

1 अक्टूबर के कारोबार के अंत में Nifty 50 22,421.95 और Sensex 71,909.70 पर बंद हुए। सप्ताह के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव काफी तेज रहा और India VIX में भी बढ़ोतरी देखने को मिली।

बाजार पर दबाव क्यों रहा ?

1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

बाजार के लिए सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली रही। सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से लगभग ₹35,861 करोड़ की शुद्ध निकासी की। महीने के अंतिम सात कारोबारी सत्रों में ही करीब ₹19,273 करोड़ की निकासी हुई।इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने बाजार में खरीदारी के जरिए कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। सितंबर के आंकड़ों में FII की नकद बाजार गतिविधि करीब ₹10,148.5 करोड़ की शुद्ध बिकवाली और DII की करीब ₹11,271.8 करोड़ की शुद्ध खरीद रही।

2. कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है।सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका-ईरान तनाव और संभावित ऊर्जा आपूर्ति व्यवधान की आशंका के बीच Brent crude में तेज उछाल आया। 28 सितंबर को Brent करीब 3.7% बढ़कर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल, व्यापार घाटे, रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतें आने वाले दिनों में भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगी।

3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक ब्याज दरों का असर

अमेरिकी Treasury yields में मजबूती ने emerging markets पर दबाव बढ़ाया। ऊंची अमेरिकी यील्ड की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिससे भारत जैसे बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ता है।हालांकि सप्ताह के दौरान अमेरिकी फेड अधिकारियों की कुछ टिप्पणियों के बाद अगले महीने संभावित दर वृद्धि को लेकर बाजार की उम्मीदों में कुछ बदलाव भी देखने को मिला।

4. रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी दबाव

इक्विटी बाजार की कमजोरी के साथ रुपये और भारतीय बॉन्ड बाजार पर भी दबाव रहा। Reuters के अनुसार सप्ताह के दौरान रुपये ने दो महीने के निचले स्तर के आसपास कारोबार किया और भारतीय 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड भी ऊंची रही।

सेक्टरों का हाल

इस सप्ताह व्यापक बाजार में बिकवाली देखने को मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 16 प्रमुख सेक्टरों में से अधिकांश में गिरावट रही। Auto और Consumer Durables पर विशेष दबाव देखा गया, जबकि IT सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहा।28 सितंबर को बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली और वित्तीय सेवाओं तथा बैंकिंग शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज हुई। IT सेक्टर को अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिला, जबकि Auto, Metal, Consumer Durables, FMCG और Realty में 1 अक्टूबर को दबाव रहा।

बाजार में एक सकारात्मक संकेत भी

कमजोर शेयर बाजार के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ आंकड़े पूरी तरह निराशाजनक नहीं रहे।सितंबर में भारत का Manufacturing PMI 55.1 रहा, जो अगस्त के 52.8 से बेहतर था। नए ऑर्डरों में भी मजबूती दर्ज की गई। हालांकि आंकड़ा बाजार की अपेक्षा 55.7 से थोड़ा कम रहा।इससे संकेत मिलता है कि बाजार में मौजूदा कमजोरी का पूरा कारण घरेलू आर्थिक गतिविधियों की कमजोरी नहीं है। वैश्विक कारक, विदेशी पूंजी का प्रवाह, तेल और ब्याज दरों से जुड़ी चिंताएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आने वाला सप्ताह: किन बातों पर रहेगी नजर ?

5 अक्टूबर से शुरू होने वाला अगला कारोबारी सप्ताह बाजार के लिए खासा महत्वपूर्ण है। इसका सबसे बड़ा कारण RBI की मौद्रिक नीति बैठक है।7 अक्टूबर को RBI का फैसला अगले सप्ताह 7 अक्टूबर को RBI Monetary Policy Committee का निर्णय निर्धारित है। बाजार की नजर केवल रेपो रेट पर ही नहीं बल्कि RBI के महंगाई, विकास, रुपये और तरलता को लेकर रुख पर भी रहेगी।RBI का फैसला बैंकिंग, NBFC, रियल एस्टेट और ब्याज दरों से संवेदनशील कंपनियों के शेयरों में खास हलचल ला सकता है।

Services PMI भी महत्वपूर्ण

6 अक्टूबर को सितंबर का India Services PMI आंकड़ा जारी होना है। अगस्त में Services PMI 55.8 रहा था।यह आंकड़ा घरेलू सेवा क्षेत्र की गतिविधियों और कारोबारी मांग की स्थिति का संकेत देगा।

वैश्विक बाजारों से भी मिलेगा संकेत

अगले सप्ताह भारतीय बाजार की दिशा केवल घरेलू घटनाओं से तय नहीं होगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, कच्चा तेल और अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।वैश्विक स्तर पर इक्विटी फंडों में लगातार दूसरे सप्ताह निवेश आया है, हालांकि emerging markets में इक्विटी और बॉन्ड दोनों से निकासी देखने को मिली।इसलिए भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का रुख अगले सप्ताह भी महत्वपूर्ण रहेगा।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है ?

मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में किसी भी समय तकनीकी आधार पर उछाल देखने को मिल सकता है, लेकिन इसे तत्काल और स्थायी ट्रेंड बदलने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

अगले सप्ताह निवेशकों को मुख्य रूप से इन संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए:

– RBI की मौद्रिक नीति और उसका रुख
– FII और DII की खरीद-बिक्री
– कच्चे तेल की कीमत
– अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
– रुपये की चाल
– अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक घटनाक्रम
– घरेलू आर्थिक आंकड़े
– कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों से जुड़ी उम्मीदें

निष्कर्ष

भारतीय शेयर बाजार इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां घरेलू आर्थिक संकेत और वैश्विक जोखिम एक-दूसरे के विपरीत दिशा में दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ Manufacturing PMI जैसे आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ FII बिकवाली, महंगा तेल, ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।आने वाला सप्ताह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार को RBI की नीति, वैश्विक संकेतों और विदेशी पूंजी के प्रवाह से दिशा मिल सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए बाजार की हर तेजी या गिरावट पर प्रतिक्रिया देने के बजाय अपने निवेश की अवधि, जोखिम क्षमता और परिसंपत्ति आवंटन को ध्यान में रखना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

वार्ताहब का संदेश:बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का हिस्सा है। अल्पकालिक घटनाओं के बजाय दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों और उचित जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखकर निवेश संबंधी निर्णय लेना महत्वपूर्ण है।

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Author: vartahub

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