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RBI का NBFCs पर बड़ा अपडेट: 5 का CoR रद्द, 8 कंपनियों ने खुद छोड़ा रजिस्ट्रेशन; देखें पूरी लिस्ट

RBI का NBFCs पर बड़ा अपडेट
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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को लेकर महत्वपूर्ण नियामकीय कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने 5 NBFCs का Certificate of Registration (CoR) रद्द कर दिया है, जबकि 8 अन्य NBFCs ने अपना CoR सरेंडर किया है। RBI ने यह जानकारी 17 सितंबर 2026 को जारी की।हालांकि, इन दोनों तरह की कार्रवाइयों को एक जैसा समझना सही नहीं होगा। पांच कंपनियों का रजिस्ट्रेशन RBI ने रद्द किया है, जबकि आठ कंपनियों ने अलग-अलग कारोबारी और कॉरपोरेट कारणों से अपना CoR वापस किया था, जिसके बाद RBI ने उसे रद्द किया।

किन 5 NBFCs का रजिस्ट्रेशन RBI ने रद्द किया?

RBI के अनुसार, इन पांच कंपनियों के Certificate of Registration रद्द किए गए हैं:

1. Dar’s Financial Services
2. Rolta Holding and Finance Corporation
3. Vasudeo Securities
4. Parsoli Corporation
5. A C Choksi Financial Services

इन कंपनियों के लिए RBI की कार्रवाई का मतलब है कि वे NBFC के रूप में कारोबार करने के लिए दिए गए इस रजिस्ट्रेशन के आधार पर आगे गतिविधियां नहीं चला सकतीं।

8 NBFCs ने क्यों लौटाया अपना CoR?

RBI के मुताबिक आठ NBFCs ने अलग-अलग कारणों से अपना Certificate of Registration सरेंडर किया। इनमें कुछ कंपनियां NBFC कारोबार से बाहर हो गईं, जबकि कुछ कंपनियां नियामकीय श्रेणी में बदलाव या कंपनी के कानूनी अस्तित्व समाप्त होने के कारण इस रजिस्ट्रेशन से बाहर हुईं।

1. NBFC कारोबार से बाहर निकलने वाली कंपनियां

इन चार कंपनियों ने Non-Banking Financial Institution (NBFI) कारोबार से बाहर निकलने के कारण अपना CoR सरेंडर किया:

– Anupam Mercantile Limited
– Grand Motor and Finance Private Limited
– Sky Limit International Finance Limited
– ASA International India Microfinance Limited

2. Unregistered CIC के मानदंड पूरे करने वाली कंपनी

– Anagram Industries Limited

इस कंपनी ने ऐसे Unregistered Core Investment Company (CIC) के लिए निर्धारित मानदंड पूरे करने के बाद CoR सरेंडर किया, जिसके लिए NBFC के रूप में अलग रजिस्ट्रेशन आवश्यक नहीं है।

3. Unregistered Type-I NBFC के मानदंड पूरे करने वाली कंपनी

– CDN Finance Private Limited

RBI के अनुसार, कंपनी ने Unregistered Type-I NBFC के लिए निर्धारित मानदंड पूरे किए। RBI की जानकारी के मुताबिक ऐसी श्रेणी में आने वाली इकाई सार्वजनिक धन का इस्तेमाल नहीं कर रही थी और उसका ग्राहक संपर्क भी नहीं था।

4. कानूनी इकाई के रूप में अस्तित्व समाप्त होने वाली कंपनियां

इन दो कंपनियों का विलय, merger, dissolution या voluntary strike-off जैसी प्रक्रिया के कारण कानूनी इकाई के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया:

– Shivam Securities Private Limited
– April Investment and Finance Private Limited

क्या इसका मतलब इन सभी कंपनियों पर RBI की कार्रवाई हुई है?

जरूरी नहीं। CoR रद्द होने और CoR सरेंडर करने के कारण अलग-अलग हैं। आठ कंपनियों के मामले में RBI के रिकॉर्ड में कारोबार से बाहर निकलने, नियामकीय श्रेणी में आने या कानूनी इकाई के समाप्त होने जैसे कारण दिए गए हैं। इसलिए सभी 13 मामलों को एक ही तरह की “दंडात्मक कार्रवाई” के रूप में देखना सही नहीं होगा।RBI ने यह कार्रवाई Reserve Bank of India Act, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत की है। आठ कंपनियों के मामले में कंपनियों द्वारा CoR सरेंडर किए जाने के बाद RBI ने उनके प्रमाणपत्र रद्द किए।

ग्राहकों और निवेशकों के लिए क्या समझना जरूरी है?

RBI की इस घोषणा में 13 कंपनियों के CoR रद्द/सरेंडर होने की जानकारी दी गई है, लेकिन हर कंपनी का मामला अलग है। इसलिए किसी कंपनी के नाम के सामने “लाइसेंस रद्द” देखकर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि हर मामले में नियामकीय उल्लंघन ही कारण था।विशेष रूप से आठ कंपनियों के मामले में RBI ने कारोबार से बाहर निकलने, कंपनी के कानूनी अस्तित्व समाप्त होने और ऐसी नियामकीय श्रेणी में आने जैसे कारण बताए हैं जिनमें NBFC रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं रहती।

निष्कर्ष

RBI की 17 सितंबर की कार्रवाई में कुल 13 NBFCs से जुड़ा बदलाव हुआ है। इनमें 5 कंपनियों का Certificate of Registration RBI ने रद्द किया, जबकि 8 कंपनियों ने अपना CoR सरेंडर किया, जिसे RBI ने स्वीकार करते हुए रद्द किया।इस कार्रवाई से एक बात स्पष्ट है कि NBFC सेक्टर में नियामकीय स्थिति लगातार अपडेट हो रही है और कंपनियों की कारोबारी गतिविधि, कॉरपोरेट संरचना तथा RBI के निर्धारित मानदंडों के आधार पर उनके रजिस्ट्रेशन की स्थिति बदली जा रही है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट RBI द्वारा जारी जानकारी और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है। किसी कंपनी की नियामकीय स्थिति को समझने के लिए संबंधित RBI रिकॉर्ड को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।

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Author: vartahub

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